📖कहानी :- चालाक सियार🦊और बूढ़ा शेर🦁 – समझदारी ही असली ताकत!
बहुत दूर एक हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में एक बूढ़ा शेर रहता था। पहले वह जंगल का राजा था — ताकतवर, तेज़ और सबका डर।
लेकिन अब उम्र ने उसे कमजोर बना दिया था। शिकार करना उसके लिए बहुत मुश्किल हो गया था।
एक दिन वह भूखा-प्यासा जंगल में भटकता हुआ घूम रहा था।
थोड़ी देर बाद उसे एक छोटी-सी गुफा दिखाई दी।
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| चालाक सियार और बूढ़ा शेर – समझदारी ही असली ताकत! |
शेर (थका हुआ): “हम्म… लगता है इस गुफा में कोई जानवर रहता होगा। अगर मैं यहाँ छिप जाऊँ, तो जो भी अंदर आएगा… वो मेरा खाना बन जाएगा!”
वह मुस्कराया और धीरे से अंदर चला गया। अंदर ठंडी हवा चल रही थी, तो शेर ने वहीं लेटकर आराम करने लगा।
—
थोड़ी देर बाद एक चालाक सियार वहाँ आया।
उसने देखा — गुफा के बाहर कई पंजों के निशान थे… मगर अजीब बात यह थी कि अंदर जाने के निशान तो थे, लेकिन बाहर आने के नहीं!
सियार (धीरे-धीरे सोचते हुए): “हूँ… ये कुछ तो गड़बड़ है! गुफा में कुछ ज़रूर छिपा है।”
फिर वह ज़ोर से बोला —
सियार (ऊँची आवाज़ में): “अरे गुफा! बोलो ना, क्या आज मैं अंदर आ सकता हूँ? तुम रोज़ मुझे जवाब देती हो!”
अंदर बैठे शेर ने ये सुना।
शेर (मन में): “अरे वाह! ये तो बोलने वाली गुफा है! अब अगर मैं जवाब नहीं दूँगा तो ये भाग जाएगा।”
फिर शेर ने अपनी भारी आवाज़ में कहा —
शेर: “हाँ हाँ, आ जाओ मेरे दोस्त! आज अंदर आना बिल्कुल सुरक्षित है!”
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| चालाक सियार और बूढ़ा शेर – समझदारी ही असली ताकत! |
सियार हँस पड़ा।
सियार (मुस्कराते हुए): “ओह! तो अब गुफा बोलने लगी है, है ना? पहले तो तुम्हारी आवाज़ इतनी भारी नहीं थी!”
यह कहकर सियार ने तेजी से वहाँ से दौड़ लगा दी और दूर जाकर बोला —
सियार (दूर से चिल्लाया): “शेर मामा! अपनी चालाकी अपने पास रखो, जंगल में मुझसे ज़्यादा होशियार कोई नहीं!”
शेर गुस्से में दहाड़ा, पर तब तक सियार गायब हो चुका था।




