“दोस्तों! आज मैं तुम्हें OKIDS KAHANI में एक मज़ेदार कहानी सुनाने वाला हूँ —“डुग्गु और रोबोट नोवा – एक अनोखी दोस्ती”
(OKIDS KAHANI की नई रोबोट सीरीज़ की पहली कहानी) चलो शुरू करते हैं!”
📖कहानी :- डुग्गु और रोबोट नोवा – एक अनोखी दोस्ती❤️
एक सुनहरी सुबह थी। डुग्गु बगीचे में खेल रहा था — तितलियों के पीछे भागते हुए और पेड़ों के बीच उछल-कूद करते हुए।
अचानक आसमान में एक तेज़ चमकदार रोशनी दिखी!
“वो क्या है?” डुग्गु ने ऊपर देखा।
आकाश में एक चांदी जैसा उड़नयान बड़ी तेज़ी से नीचे आ रहा था।
“धाडाम!” की आवाज़ के साथ वो बगीचे की ज़मीन पर गिर पड़ा।
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| डुग्गु और रोबोट नोवा – एक अनोखी दोस्ती❤️ |
डुग्गु डर गया और झाड़ी के पीछे छिप गया।
धीरे-धीरे उस यान का दरवाज़ा खुला, और अंदर से एक रोबोट बाहर निकला।
वो रोबोट चमकदार नीले और सिल्वर रंग का था, उसके सीने पर एक नीली लाइट जल रही थी।
उसका नाम था — नोवा (NOVA)।
नोवा ने चारों तरफ देखा,
“हेलो…? कोई है यहाँ?”
लेकिन आस-पास कोई नहीं था।
थोड़ा आगे बढ़ते ही उसकी नज़र डुग्गु पर पड़ी, जो झाड़ी के पीछे से झाँक रहा था।
नोवा मुस्कुराया,
“ओह! एक छोटा इंसान! हेलो फ्रेंड!”
डुग्गु घबरा गया —
“तू… तू कौन है? तू क्या चाहता है?”
नोवा ने नर्म आवाज़ में कहा,
“डर मत। मैं नोवा हूँ। मेरा स्पेसशिप खराब हो गया, इसलिए यहाँ गिर गया। मैं किसी को नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा। मैं दोस्ती करने आया हूँ।”
डुग्गु अभी भी थोड़ा पीछे हट गया,
“दोस्ती? लेकिन… तू तो मशीन है!”
नोवा ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ, मैं मशीन हूँ… पर मेरे दिल में इंसानों जैसी भावनाएँ हैं। मैं दोस्त बन सकता हूँ।”
डुग्गु ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से उसकी तरफ देखा —
“सच में? तू मेरा दोस्त बनेगा?”
नोवा ने हाथ बढ़ाया,
“ज़रूर, दोस्त!”
डुग्गु ने उसका हाथ थाम लिया,और डुग्गु बोला मेरा नाम डुग्गू है और आपका?,.. नोवा!!
उसी पल दोनों की दोस्ती की शुरुआत हो गई।
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| डुग्गु और रोबोट नोवा – एक अनोखी दोस्ती❤️ |
थोड़ी देर बाद डुग्गु बोला,
“चल मेरे घर, मम्मी-पापा से मिल!”
नोवा बोला, “वाह! मुझे बहुत अच्छा लगेगा।”
घर पहुँचते ही —
मम्मी: “अरे डुग्गु, ये कौन है?”
डुग्गु: “मम्मी! ये मेरा नया दोस्त है — नोवा! इसका यान बगीचे में गिर गया था।”
पापा (हँसते हुए): “वाह बेटा, ये तो बड़ा खास मेहमान है!”
नोवा: “नमस्ते आंटी, नमस्ते अंकल! मैं परेशानी नहीं बनूँगा।”
मम्मी (मुस्कुराते हुए): “अरे नहीं बेटा, तू तो बहुत प्यारा है!”
डुग्गु ने मासूमियत से पूछा,
“मम्मी, क्या नोवा हमारे घर रह सकता है?”
पापा: “अगर वो सच में दोस्त है, तो ज़रूर रह सकता है।”
नोवा खुश होकर बोला,
“अब मैं भी इस घर का हिस्सा हूँ!”
उस दिन के बाद से नोवा डुग्गु का सच्चा दोस्त बन गया।
वो स्कूल के होमवर्क में मदद करता, मज़ेदार जादुई चीज़ें दिखाता और रात को कहानी सुनाता।
🎥 पूरा वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करे:-
🧑🏻🏫 इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
सच्ची दोस्ती रूप या दुनिया से नहीं, दिल से होती है।
और कभी-कभी सबसे अच्छे दोस्त वहीं से आते हैं जहाँ हम सोच भी नहीं सकते!
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