OKIDS KAHANI की इस मजेदार कहानी में मिलिए ईमानदार बंदर और धूर्त मगरमच्छ से। यह कहानी है ”चतुर बंदर और मगरमच्छ की कहानी 🐒🐊 | Chalak Bandar aur Magarmach Hindi Moral Story” चलिए शुरू करते हैं!!

📖 Story – चतुर बंदर और मगरमच्छ की कहानी 🐒🐊 | Chalak Bandar aur Magarmach Hindi Moral Story
एक बहुत बड़ी नदी के किनारे सेब का एक विशाल पेड़ था। उस पेड़ पर एक बहुत ही समझदार बंदर रहता था।
उस पेड़ के सेब शहद जैसे मीठे थे। उसी नदी में एक बूढ़ा मगरमच्छ भी रहता था।
रोज़ बंदर पेड़ से मीठे सेब गिराता और मगरमच्छ उन्हें मजे से खाता। इसी तरह दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।
नदी का किनारा – बंदर (उछलते हुए): “मगर भाई! कैसे हो? आज के सेब तो बहुत ही रसीले हैं। ये लो, चख कर देखो!”

मगरमच्छ (सेब खाते हुए): “वाह बंदर भाई!
मज़ा आ गया। इतने मीठे सेब खिलाने के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया। मेरी पत्नी को भी ये बहुत पसंद आते हैं।”
एक दिन,
मगरमच्छ की पत्नी बहुत लालची थी। जब उसने वो मीठे सेब खाए, तो उसके मन में एक दुष्ट विचार आया।
मगरमच्छ की पत्नी- जो बंदर रोज़ इतने मीठे फल खाता है, उसका दिल कितना मीठा होगा!
उसने ज़िद की कि उसे बंदर का दिल खाना है। बेचारा मगरमच्छ भारी मन से बंदर के पास गया।
“दोस्त बंदर! आज मेरी पत्नी ने तुम्हारे लिए बहुत अच्छा खाना बनाया है। वह तुमसे मिलना चाहती है। चलो, आज हमारे घर दावत पर।
” बंदर: “अरे वाह! क्यों नहीं दोस्त। पर मुझे तैरना नहीं आता, मैं तुम्हारे घर कैसे पहुँचूँगा? “
मगरमच्छ: “तुम उसकी चिंता मत करो। तुम बस मेरी पीठ पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें नदी के पार ले चलूँगा।”
बंदर मगरमच्छ की बातों में आ गया और उसकी पीठ पर बैठ गया। जब वे नदी के बीचों-बीच पहुँचे, जहाँ पानी बहुत गहरा था,
तब मगरमच्छ को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने बंदर को सब सच बता दिया।
“दोस्त, मुझे माफ कर देना। मैं तुम्हें दावत पर नहीं, बल्कि अपनी पत्नी के पास ले जा रहा हूँ। वो तुम्हारा दिल खाना चाहती है
” बंदर सन्न रह गया!
उसे अपनी जान खतरे में दिखी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और तुरंत एक तरकीब सोची।
बंदर (हँसते हुए): “धत् तेरे की! मगर भाई, तुमने यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई?
हम बंदर तो अपना दिल पेड़ की खोखली टहनी में संभाल कर रखते हैं। मेरा दिल तो पेड़ पर ही रह गया!
” मगरमच्छ (हैरानी से): “क्या? पर अब क्या करें?
” बंदर: “जल्दी से मुझे वापस पेड़ के पास ले चलो। मैं अपना दिल उठा लेता हूँ, फिर हम तुम्हारी पत्नी के पास चलेंगे।”
मूर्ख मगरमच्छ बंदर की बात मान गया और तेज़ी से किनारे की तरफ मुड़ा। जैसे ही वे किनारे के पास पहुँचे,
बंदर ने एक लंबी छलांग लगाई और पेड़ पर चढ़ गया।
बंदर (ऊपर से चिल्लाते हुए): “मूर्ख मगरमच्छ! क्या कभी कोई अपना दिल शरीर से बाहर निकाल कर रख सकता है?
तूने दोस्ती के नाम पर मुझे धोखा दिया है। जा यहाँ से, आज से हमारी दोस्ती खत्म! “
मगरमच्छ अपनी मूर्खता पर पछताता हुआ वापस चला गया और चतुर बंदर ने अपनी जान बचा ली।
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🧑🏻🏫 इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
“मित्रों, इस कहानी से हमने सीखा,“संकट की घड़ी में समझदारी ही सबसे बड़ी ताकत होती है।” 😊
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